आज बात करते हैं राजपूत समाज की सबसे दबग महिला क्षत्राणी जो समाज के हर आंदोलन में सबसे आगे रहती हैं - Manjeet Kirtiraj Singh (मंजीत कीर्तिराज सिंह ) जीवन परिचय मंजीत कीर्तिराज सिंह का - Manjeet Kirtiraj Singh का जन्म 19 जुलाई 1980 को मध्यप्रदेश की तहसील अंजड़, बड़वानी जिला में हुआ, ये अंतिम हिंदू राजपूत सम्राट पृथ्वीराज चौहान की 24वी पीढ़ी से आती हैं। शादी - मंजीत कीर्तिराज सिंह ( manjeetkirtirajsingh ) की शादी तोमर राजपूत घराने में कीर्तिराज सिंह जी तोमर के साथ हुई, इनके पति कीर्तिराज सिंह अपने नाम होने के कारण अपने नाम के पीछे पति का नाम लगाती हैं, इनके पति कीर्तिराज सिंह जो icic बैंक में मैनेजर हैं, जो इंदौर निवास करते हैं। राजनैतिक में Manjeet Kirtiraj Singh - हर एक वक्ती किसी ना किसी राजनैतिक पार्टी सै जुड़ा होता हैं इसी में मंजीत कीर्तिराज सिंह जो करणी सेना में आने सै पहले अपने राजनैतिक गुरु मंत्री तुलसिराम सिलावट के साथ 2006 सै कांग्रेस में रही। फ़िल्म पदमावत 2018 (पद्मावती ) - 2018 में फ़िल्म पद्मावती जो बॉलीवुड ने भारत के राजपूतों के इतिहास...
राजगढ़ सादुलपुर होकर बीकानेर तक प्रस्तावित ट्रेन सियालदाह - नई दिल्ली दुरंतो एक्सप्रेस (12259-60) को संभवतः 15 फरवरी के बाद यानि शीघ्र ही बीकानेर तक विस्तारित कर दिया जाएगा, मगर उक्त ट्रेन का अभी तक सादुलपुर में स्टॉपेज नहीं रखा गया है। जैसा कि माना जा रहा था कि दिल्ली विधानसभा चुनाव के पश्चात इस महत्वपूर्ण ट्रेन को बीकानेर कर दिया जाएगा। अब रेल विभाग भी मान रहा है कि सप्ताह में चार दिन चलने वाली इस दुरंतो ट्रेन को निकट भविष्य नई दिल्ली से बीकानेर तक कर दिया जाएगा। मिली जानकारी के अनुसार नई दिल्ली के बाद रेवाड़ी, चुरु एवं रतनगढ़ स्टेशनों पर ही यह ट्रेन रुकेगी, मगर अभी तक सादुलपुर में ठहराव नहीं रखा गया है। फिर भी चूरू जिले तथा शेखावाटी के जनता एवं प्रवासियों को इस ट्रेन का बहुत लाभ मिल सकेगा।
भारत के महान पराक्रमी, क्षत्रिय शलाका पुरुष, सनातन संस्कृति के संवाहक, शौर्य और स्वाभिमान के प्रतीक, सम्राट पृथ्वीराज चौहान का आज जन्मोत्सव है। इस खास दिन पर, इस महावीर योद्धा को कोटि-कोटि नमन है। लेकिन विषय बेहद बड़ा है कि आधुनिक समय में, जातीय और धार्मिक समाज ने इन वीर सपूतों को जयंती और पुण्यतिथि में समेट कर रख दिया है। महाराणा प्रताप, बाबू वीर कुँवर सिंह, बाजीराव पेशवा, क्षत्रपति शिवाजी, राणा सांगा, भगत सिंह, चंद्रशेखर आजाद, रामप्रसाद बिस्मिल, राजगुरु, बहादुर शाह जफर जैसे, महान देशभक्त को सिर्फ किताबों के जरिये पढ़ रहे हैं और इन्हें जयंती और पुण्यतिथि में कैद कर के रख दिया गया है। यही वजह है कि ऐसे प्रतापियों की तरह का, एक भी शख्सियत, आज के समाज में पैदा नहीं ले रहा है। इन महान आत्माओं को अपने वजूद में समा कर रखने की जरूरत है। इन्हें आत्मसात करने की जरूरत है। जयंती और पुण्यतिथि मनाकर, ऐसे वीर योद्धाओं का पुनर्जन्म असम्भव है। मूल की जगह, प्रपंच और नाटक हो रहे हैं। जरा विचार कीजियेगा कि आखिर ऐसे महापुरुष, आधुनिक काल में, एक भी क्यों नहीं जन्म ले सके हैं !!!!! 7 ...
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