लोक डाउन के दिशा निर्देशों की धज्जियां से उड़ती

राजगढ़ सादुलपुर में लोक डाउन थ्री के पहले दिन 4 मई को लोक डाउन के दिशा निर्देशों की धज्जियां से उड़ती नजर आई। बड़ी संख्या में लोग कोरोना वायरस के खतरे को नजरअंदाज करते हुए लापरवाही से घूमते और भीड़ के रूप में बाजारों दुकानों पर मंडराते रहे। इसी प्रकार बाजारों में दुपहिया तथा चौपहिया वाहन काफी संख्या में ईधर उधर घुमते रहे, जिन्हें किसी तरह का कोई भय शायद इसलिए नहीं रहा हो कि छूट ....? काफी लोगों के मुँह पर मास्क नहीं थे तो ज्यादातर दुकानों पर सेनेटाइजर का व डिस्टेंस का अभाव दिखा।
लॉक डाउन 3 के लिए केंद्र और राज्य सरकार ने ना जाने क्यों अथवा किस दबाव में एक साथ ऐसी छूट दे दी ? इससे कोरोना वायरस का खतरा ज्यादा होने की आशंका बनती नजर आ रही है। उसी छूट के चलते राजगढ़ में ऐसे ही हालात रहे।
हालांकि बाजारों के खुलने इस संबंध में 3 मई की शाम को राजगढ़ थाने में अधिकारियों ने व्यापारियों के साथ बैठक लेकर चर्चा भी की थी, मगर उस बैठक के निर्णय बहुत से लोगों को रास नहीं आए। व्यापारियों ने बैठक के निर्णय पर ही आरोप-प्रत्यारोप की झड़ी लगा दी। 4 मई को जैसी बाजार खुलने की व्यवस्था की गई थी, उसके विपरीत समूचे बाजार और यहां तक की कांपलेक्स भी खुले नजर आए।
मुख्य बाजार, शीतला बाजार, रेलवे स्टेशन, इंदिरा मार्केट, कुरेशी मार्केट, नन्द प्लाजा, बस स्टैंड, सांखू रोड़ और बस स्टैंड के आसपास की सब्जी की दुकानों, ठैलों  पर ऐसी भीड़ रही, जैसे कोरोना का खात्मा हो गया है। यूं लग रहा था कि जनता किसी प्रकार का कोई खतरा महसूस नहीं कर रही हो और आज उनको सरकारी रूप से किसी तरह का भय नहीं रह गया हो ?
हालांकि पुलिस अधिकारियों व कर्मचारियों की ड्यूटी पूर्ववत देखी गई। सभी स्थानों पर पुलिस वाले मुश्तैद दिखे, मगर आज के हालातों में पुलिस वाले कुछ ऐसे नजर आए, जैसे उनके हाथ बांध दिए गए हो अथवा वह लापरवाही बरतने वालों के खिलाफ कार्यवाही नहीं करने के लिए मजबूर हो...? ऐसा भी लगा कि पुलिस की 6 सप्ताह की कड़ी मेहनत और उपलब्धि 6 घण्टे से भी कम समय में अनुपलब्धि बन गई।
यहां मैं यह भी उल्लेख करना चाहूंगा की कृषि उपज मंडी के सब्जी मार्केट में भी 4 मई की सुबह बड़ी संख्या में पिलानी लुहारू के दुकानदार सब्जी खरीदने के लिए पहुंच गए थे और उसके बाद सुबह 8-00 बजे ही दुकानें खुल गई। 1-00 बजे तक लगभग सभी बाजारों की हालत भी ऐसी ही रही, जिससे लगा है कि जनता ने दिशानिर्देशों की पालना नहीं करने का मानस बना लिया हो और नागरिक लापरवाह होकर कोरोना के खतरे को आमंत्रित करते दिखे।

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