आखिर पुलिस वाले भी इंसान होते हैं आखिर क्यों ......

राजगढ़ सादुलपुर में ही नहीं पूरे प्रदेश में राजस्थान पुलिस कोरोना वायरस के खतरे के इस संकट के समय में मुस्तैदी से दिन रात ड्यूटी देती नजर आ रही है। प्रदेशभर में पुलिस प्रशासन जिस प्रकार की जिम्मेदारी निभा रहा है, वह सराहनीय है और राजगढ़ सादुलपुर में जिस प्रकार की व्यवस्थाएं हैं, वह तो उल्लेखनीय हैं। इसके बावजूद दिन रात ड्यूटी कर रहे पुलिस वालों को ना सरकार समुचित आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध करवा पा रही नजर आती है तथा ना ही हमारी रक्षा के लिए इस समय मुस्तैद पुलिसकर्मियों को हम लोग आवश्यक सुविधाएं दे पा रहे हैं। हालांकि सराहनीय बात यह भी है कि राजगढ़ सादुलपुर कस्बे में सेवाभावी युवक तथा स्वयंसेवी संगठनों से जुड़े कार्यकर्ता अपनी जिम्मेदारी समझकर ड्यूटीरत पुलिसकर्मियों के लिए चाय, अल्पाहार नाश्ते व फल फ्रूट की सीमित की व्यवस्थाओं में लगे नजर आते हैं। पुलिसकर्मियों को मास्क भी उपलब्ध करवाए गए हैं, मगर सबसे बड़ी समस्या है।
 कि पुलिसकर्मियों उनके पास ना तो पीने के लिए शुद्ध जल उपलब्ध रहता है और ना ही उनके पास सैनिटाइजर होता है। 5 अप्रैल को जब मैं कस्बे में घूम कर जानकारी ले रहा था तो देखा कि रेलवे स्टेशन के आगे लगी हुई प्याऊ का पानी सिपाही पी रहे थे। इसी प्रकार सांखू तिराहे के पास भी इधर उधर से जल मंगवा कर। गर्मी में तैनात सिपाही प्यास बुझा रहे थे। कमोबेश ऐसी ही स्थिति शीतला बाजार, अंबेडकर सर्किल और सिधमुख चौराहे के पास नजर आई। 
इस दौरान मेरी कई सिपाहियों से बात हुई तो उनके मन में कुछ व्यथा भी नजर आई। उनका कहना है कि मास्क तो उनके पास उपलब्ध हैं, मगर सरकारी रूप से माकूल सुविधाएं नहीं मिल पा रही है। उन्होंने कहा कि जब प्यास लगती है तो उन्हें आशंका के बावजूद इधर उधर से लेकर पानी पीना पड़ता है। ना ही उनके हाथों की सफाई के लिए सैनिटाइजर आदि की व्यवस्था है। इन पुलिसकर्मियों के इक्का दुक्का को छोड़ कर अन्य के पास हैंड ग्लोवज नहीं थे। इस स्थिति में को समझते हुए मैं आप सभी को यह जानकारी दे रहा हूं और सेवाभावी सज्जनों, स्वयंसेवी संगठनों और राशन सामग्री आदि वितरित करने वाले श्रेष्ठी जनों तथा उनके प्रतिनिधियों से अपील करना चाहूंगा कि हो सके तो सेवारत इन पुलिसकर्मियों के लिए रोजाना एक बोतल बिसलेरी के शुद्ध जल तथा ज्यादा नहीं तो कम से कम सप्ताह में 100 एमएल की सैनिटाइजर की बोतल की व्यवस्था करवाई जाए। यह आप हम सभी के लिए अच्छा रहेगा। ध्यान रहे कि आप हमसे ज्यादा खतरा दिन रात सड़कों, राहों में ड्यूटी देने वाले इन पुलिसकर्मियों को ज्यादा रहता है। साथ ही एक सुझाव यह भी देना चाहता हूं कि यदि कोई संगठन अथवा सेवाभावी जन, श्रेष्ठिजन इस व्यवस्था में आगे आए, तो समन्वित तरीके से मिलकर व्यवस्था करें ताकि उचित प्रबंधन हो सके।

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